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    Bihar Politics : आज सीएम नीतीश कुमार के आवास पर इफ्तार पार्टी, मुस्लिम संगठनों ने किया विरोध, इमारत-ए-सरिया का बड़ा एलान

    BNP डेस्क 2025-03-23 07:16:54 राज्य

      पटना न्यूज : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने सरकारी आवास में इफ्तार पार्टी का आयोजन कर रहे हैं. जिसमें आम से खास सभी लोगों को आमंत्रण है. हालांकि मुस्लिम संगठनों ने बहिष्कार की घोषणा कर सीएम की टेंशन बढ़ा दी है. जेडीयू द्वारा वक्फ बिल के समर्थन से मुस्लिम संगठन नाराज हैं। जिसके चलते इमारत-ए-सरिया समेत बिहार के मुस्लिम संगठनों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी का विरोध करने का फैसला लिया है। 

      • नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी का विरोध, इमारत-ए-सरिया का एलान

      दरअसल मुस्लिम संगठनों की ओर से सीएम नीतीश कुमार से नाराजगी व्यक्त की जा रही है। और उनके द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी का बहिष्कार करने की बात भी कही गई है. मुस्लिम संगठनों का यह विरोध केंद्र सरकार की वक्फ संशोधन विधेयक को नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के समर्थन को लेकर बताया जा रहा है. इमारत-ए-सरिया ने कहा है कि बिहार के प्रमुख मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने रविवार 23 मार्च को होने वाली मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दावत-ए-इफ्तार के बायकॉट की घोषणा की है। इन संगठनों की ओर से नीतीश कुमार को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि यह फैसला आपकी ओर से प्रस्तावित वक्फ संशोधन बिल 2024 के समर्थन के खिलाफ विरोध के तौर पर लिया गया है।

      • नीतीश के साथ चिराग का भी विरोध

      इमारत-ए-सरिया की ओर से कहा गया है कि बिहार के प्रमुख मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दावत-ए-इफ्तार के बहिष्कार की घोषणा की है. इन संगठनों की ओर से नीतीश कुमार को पत्र भी लिखा गया है. पत्र लिखने वाले संगठनों में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, इमारत-ए-शरिया, जमीयत उलेमा हिंद, जमीयत अहले हदीस, जमात-ए-इस्लामी हिंद, खानकाह मुजीबिया और खानकाह रहमानी शामिल हैं. वक्फ बिल को लेकर जमीयत उलेमा ए हिंद के मौलाना अरशद मदनी ने तो फरमान जारी कर न केवल नीतीश कुमार बल्कि चन्द्र बाबू नायडू और चिराग पासवान की इफ्तार पार्टी का भी बहिष्कार करने के लिए फरमान जारी किया है और इसके कारण नीतीश कुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं. 

      • वक्फ बिल के समर्थन से मुस्लिम संगठन नाराज

      पत्र में इन संगठनों ने नीतीश कुमार से कहा है कि आपने धर्मनिरपेक्ष शासन और अल्पसंख्यकों के अधिकार की सुरक्षा के वादे पर सत्ता हासिल की थी लेकिन भाजपा के साथ आपका गठबंधन और अतार्किक व असंवैधानिक वक्फ संशोधन बिल को आपका समर्थन आपके उन्हीं वादों का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है।

      इन संगठनों ने स्पष्ट शब्दों में अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि वक्फ संशोधन बिल 2024 से समर्थन तुरंत वापस लिया जाए। वक्फ संशोधन बिल के नुकसान को बताते हुए पत्र में कहा गया है कि अगर यह संशोधन लागू होता है तो यह शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, महिलाओं के केंद्र और धार्मिक स्थानों पर सदियों पुरानी वक्फ जायदादों को खत्म कर देगा। इससे मुस्लिम समुदाय में गरीबी और अभाव और बढ़ेगा जैसा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में पहले ही बताया जा चुका है।

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